07/01/2015

यौन उदासीनता

जब "यौन उदासीन" लोगों के संगठन के बारे में सुना तो कुछ आश्चर्य सा हुआ. काफ़ी समय से मुझे यौन विषयों में दिलचस्पी है और इस क्षेत्र में कुछ शौध कार्य भी कर चुका हूँ, इसलिए सोचता था कि इस क्षेत्र की हर छोटी बड़ी बात की कुछ न कुछ जानकारी मुझे है, लेकिन जन्मगत यौन उदासीनता की बात भी हो सकती है, यह नहीं सोचा था.

Sexuality - graphic design by S. Deepak

लड़कपन में जब यौन इच्छाएँ जागती हैं तो किशोर किशोरियों के लिए सेक्स से जुड़े बहुत से प्रश्न बहुत अहम हो जाते हैं. उस समय यह सोचना कि कभी ऐसा समय भी आ सकता है जब यौन सम्बन्धों के लिए साथी के होते हुए भी यौन इच्छा नहीं हो, कुछ अविश्वासनीय सा लगता है. आजकल एक नयी हिन्दी फ़िल्म का विज्ञापन आता है, जिसमें तीन लड़के आपस में बात करते हैं और एक कहता है कि अक्सर लड़कियाँ कहती हैं कि "अभी मेरा मन नहीं तो कभी कभी पुरुष भी यही कह सकता है कि सेक्स के लिए उसका मन नहीं", तो दूसरा लड़का आश्चर्य से कहता है, "कोई आदमी कहे कि उसका सेक्स का मन नहीं, क्या ऐसा सचमुच हो सकता है?" यानि उनका सोचना है कि पुरुषों को तो हमेशा सेक्स की चाह रहती है. लेकिन अगर आप विवाहित हों या किसी लम्बे समय से आत्मीय रिश्ते से जुड़े हों तो अवश्य ऐसे मौकों से गुज़रे होगें जब यौन सम्बन्धों की इच्छा न हो. और अगर अब तक ऐसा कभी नहीं हुआ तो भविष्य में हो सकता है.

आज कल की भागती दौड़ती दुनिया में, भागम भाग का टेंशन, काम का टेंशन या किसी अन्य बात की चिंता या जल्दबाज़ी, यौनिक आत्मीयता की नाजुक इच्छा अक्सर खो जाती है. इंटरनेट और डीवीडी पर वयस्कों के लिए कामुक साहित्य और फ़िल्में (पोर्नोग्राफ़ी) आज बहुत आसानी से उपलब्ध हैं. कुछ लोग इनका प्रयोग अपनी खोयी हुई यौन इच्छा को जगाने के लिए भी करते हैं, लेकिन इसका अधिक प्रयोग भी यौन उदासीनता का बड़ा कारण है. इसलिए यौन उदासीनता के उपचार के लिए कामुक साहित्य, फ़िल्मों और यौन सम्बन्धों से कुछ दिन का उपवास लेने की सलाह दी जाती है.

कुछ लोग सब कुछ जान कर और सोच कर यौन सम्बन्ध न बनाने यानि ब्रह्मचर्य का व्रत लेते हैं, जैसे कि कैथोलिक पादरी या हिन्दू आध्यात्मिक गुरु. इस तरह के ब्रह्मचर्य का पालन करना आसान नहीं. भारतीय मनोवैज्ञानिक और सुप्रसिद्ध लेखक सुधीर कक्कड़ ने अपनी पुस्तक "मनोवैज्ञानिक और आध्यात्मिक" (The psychoanalyst and the mystic) में लिखा है कि "गुरु होने का खतरा यह है कि उनका भक्त उन्हें अपने माता पिता के समान रूप में देखना है. इस खतरे की गुरु को समझ होनी चाहिये." उनका कहना है कि यह बात केवल धार्मिक गुरुओं के लिए नहीं, मनोवैज्ञानिकों और चिकित्सकों के लिए भी लागू होती है. लेकिन जिस तरह से और जितने अधिक लोगों की, और जितने लम्बे समय के लिए, धार्मिक गुरुओं के प्रति इस तरह की भावनाएँ होती है, उससे गुरु के पथभ्रष्ट होने का खतरा अधिक होता है. भक्तों की बातें सुन सुन कर, वह स्वयं को सर्वशक्तिमान, सामान्य मानव से ऊँचा समझने लगते हैं. इसका एक नतीज़ा यह भी होता है कि वे यौनिक दोषों में गिर जाते हैं. 70 साल के गुरु जो छुप कर अपनी जवान भक्तिनियों को निर्वस्त्र देखते हैं या बुढ़ापे में भी कई स्त्रियों से सम्बन्ध बनाते हैं, इस तरह के इनके बहुत से उदाहरण मिलते ही रहते हैं.

जन्मगत यौन उदासीनता की बात करने वाले जानबूझ कर ब्रह्मचर्य जैसा कोई निर्णय नहीं लेते, बल्कि उनका कहना है कि पैदाइश से ही, उनके मन में सेक्स सम्बन्धों के प्रति कोई आकर्षण नहीं होता. इतालवी यौन उदासीन संगठन के 28 वर्षीय अध्यक्ष एमानूऐले का कहना है कि उनके कई युवतियों से प्रेम सम्बन्ध हुए हैं. उन्हें भावनात्मक प्रेम में विश्वास है, शारीरिक प्रेम में नहीं. उन्हें चुम्बन या प्यार से गले लगना अच्छा लगता है लेकिन वह सेक्स सम्बन्ध की कोई इच्छा मन में महसूस नहीं करते और न ही अभी तक यह सम्बन्ध उन्होंने किसी से बनाये. उनका कहना है कि उनके प्रजनन अंगों में कोई दोष नहीं और अगर चाहें तो सेक्स सम्बन्ध बना सकते हैं, लेकिन वह नहीं चाहते.

यह पूछने पर कि अगर आप सम्भोग नहीं चाहते पर आप की प्रेयसी चाहती हो या आप परिवार बनाना चाहते हों, तो एमानूऐले कहते हैं कि विषेश परिस्थितियों में वह सम्भोग कर सकते हैं, पर आप तौर पर वह इसके बिना ही रहना चाहेंगे.

पर मैं सोचता हूँ कि अगर एक बार सेक्स का आनन्द ले लें तो शायद उनकी यौन उदासीनता ही समाप्त हो जाये?

क्या यौन उदासीनता को भी अंतरलैंगिकता, समलैंगिकता या द्विलैंगिकता की तरह, यौन विभिन्नता का हिस्सा समझना चाहिये? शायद मनोवैज्ञानिक इसे यौन विभिन्नता के रूप में नहीं देखेंगे बल्कि बीमारी के रूप में देंखें. शायद इनका अवचेतन मन वैसे यौन सम्बन्ध चाहता है जिन्हें सामाजिक स्वीकृति नहीं है और जिनका सामना न करने के लिए यह लोग यौन उदासीन हो जाते हैं?

पर अगर जो लोग इस तरह महसूस करते हैं अगर वह खुश हैं तो किसी और को इसमें परेशानी नहीं होनी चाहिये. इस संगठन का अपना वेबपृष्ठ भी है जिसके करीब तीस हज़ार सदस्य हैं. यह नहीं मालूम कि संगठन में भारतीय सदस्य भी हैं और कितने. इस वेबपृष्ठ पर आप इस तरह के लोगों के बारे में जानकारी पा सकते हैं.

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