07/01/2015

जब शरीर जेल बन जाये

जब बच्चा पैदा होता हो तो आसान लगता है यह बताना कि वह बच्चा लड़का है या लड़की, पर मानव की यौन पहचान (gender identity) का बनना इतना आसान नहीं. बच्चे के कोषों में बंद जीन (Genes) में बच्चे की एक यौन पहचान बंद होती है. बच्चे के भीतरी और बाह्य यौन अंगों (genitals) में एक अन्य यौन पहचान बंद होती है. मानसिक रूप से बच्चे की एक अन्य यौन पहचान होती है, जिससे वह स्वयं को पुरुष या स्त्री महसूस करता है. अधिकतर इन विभिन्न यौन पहचानों में समानता होती है तो बच्चे को अपनी यौन पहचान की वजह से परेशान नहीं होना पड़ता. पर जब इनमें से कोई यौन पहचान का दूसरे से मेल न बैठे तो क्या होता है?

आम लोग इस बात को समलैंगिकता (homosexuality) और विषमलैंगिकता (heterosexuality) के दायरों मे बाँट कर देखते है पर असल में यौन पहचान और यौन सम्बंधों की पसंद दो भिन्न बातें हैं. जीन, यौन अंग और मानसिक रुप में यौन पहचान में मेल खाने वाला पुरुष या स्त्री समलैंगिक या विषमलैंगिक हो सकते हैं. स्वयं को पुरुष या नारी महसूस करना पर अपने से दूसरे लिंग के कपड़े पहनने की इच्छा रखना इस सब से भी भिन्न बात है. इसके बारे में भी लोगों में समझ कम होती है.

जब मानसिक यौन पहचान यौन अंगो से मेल न खाये तो वह व्यक्ति अपने आप को गलत शरीर में कैद पाता है. इस तरह पुरुष शरीर वाले लोग जो मानसिक रूप से स्वयं को स्त्री रुप में महसूस करते हैं अपने पुरुष शरीर को जेल की तरह से महसूस करते हैं. इसी तरह, स्त्री शरीर में स्वयं को पुरुष महसूस करने वाला व्यक्ति भी अपने नारी शरीर को कैद की तरह से महसूस करते हैं. दोनों ही हालातों में सेक्स बदलने की बात हो सकती है.

जब अपने शरीर को कैद की तरह महसूस करना सहन न हो तो शल्यचिकित्सा से सेक्स बदलने की बात की जाती है. कई देशों में कानून इस तरह के सेक्स परिवर्तन को नहीं मानता पर इटली में इस तरह सेक्स बदलने की अनुमति है और ओप्रेशन के बाद यहाँ का कानून आप को नाम बदल कर कानूनी तौर पर लिंग बदलने की स्वतंत्रता देता है. प्लास्टिक सर्जरी से नारी शरीर में पुरुष यौन अंग बनाना और पुरुष शरीर में नारी यौन अंग बनाना, दोनो ही हो सकते हैं, हालाँकि दोनो ओप्रेशन जटिल और कठिन हैं. इस लिए ओप्रेशन से पहले यह पक्का करना कि सचमुच उस व्यक्ति में यौन अंगों और मानसिक यौन पहचान में अंतर है आवश्यक है. इसके लिए कम से कम छह महीने तक व्यक्ति को मनोविज्ञान विषेशज्ञ के द्वारा परखा जाता है, यह जाँचा जाता है कि ओप्रेशन से होने वाली तकलीफ़ और कठिनाईयाँ सहने का उसमें साहस है या नहीं. अगर मनोविज्ञान विषेशज्ञ का निर्णय हो कि हाँ यह व्यक्ति सेक्स बदलाव की लिए उपयुक्त है तो उस व्यक्ति को हारमोन भी दिये जाते हैं, नारी बनने की चाह रखने वाले पुरुष को नारी हारमोन और पुरुष बनने की चाह रखने वाली नारी को पुरुष होरमोन, जिनसे उनके शरीर में बाह्य बदलाव आने लगता है. जैसे पुरुषों में स्तन बढ़ जाते हैं, शरीर के बाल कम हो जाते हैं, चमड़ी अधिक मुलायम हो जाती है और स्त्रियों में आवाज भारी होने लगती है, बाल निकल आते हैं. धीरे धीरे, व्यक्ति को प्रोत्साहित किया जाता है कि वह मानिसक रूप में अपने आप को जिस लिंग का महसूस करता है उसके हिसाब से कपड़े पहने.

पुरुष हो कर नारी कपड़े पहनना या नारी हो कर पुरुष भेष बनाना उतना आसान नहीं जितना आप सोच सकते हैं क्योंकि हारमोन लेने और ओप्रेशन होने के बावजूद लोग पहचान जाते हैं कि वे सामान्य नारी या पुरुष नहीं, और क्रूरता से उनकी हँसी उड़ाते हैं, या उनसे बात नहीं करना चाहते. जो व्यक्ति सेक्स बदलाना चाहता है उसमें इस तरह की स्थितियों का सामना करना साहस चाहिये. यह साहस भी चाहिये कि उनके मित्र, उनके परिवार के लोग शायद इस बात से खुश न हों और उनसे नाता तोड़ लें, तो उसे स्वीकार कर सके. जब यह पक्का हो जाये कि उस व्यक्ति में अपनी यौन पहचान बदल कर जीने का साहस है, वह सब कठिनाईयों से लड़ने के लिए तैयार है तभी ओप्रेशन किया जाता है. पुरुष से नारी बनने का ओप्रेशन कुछ सरल है जबकि नारी से पुरुष बनने का ओप्रेशन कुछ अधिक कठिन है. इस तरह के सेक्स बदले हुए नारी या पुरुष में यौन सम्बंध बनाने की सारी क्षमता होती है, पर न तो नारी बना पुरुष कभी गर्भवती बन सकती है और न ही नारी से पुरुष बनने वाला व्यक्ति में बच्चे पैदा करने के लिए वीर्य हो सकता है.

कुछ साल पहले इस विषय पर एक अमरीकी फ़िल्म आयी थी, ट्राँसअमेरिका (Transmaerica) जिसमें शल्य चिकित्सा से नारी बनने के ओप्रेशन की तैयारी करने वाले पुरुष की बात को संवेदना से दिखाया गया था. इन सब विषयों से जुड़े भारतीय कानून अठहारवीं सदी के विकटोरियन कानून हैं जो मानवता और मानव अधिकारों की बात नहीं करते बल्कि इस द्वंद में फँसे लोगों को अपराधी या बीमारी की दृष्टि से देखते हैं. इसलिए भारत में इस तरह के व्यक्तियों के पास समाज से बाहर जा कर हिँजड़ा बनने या समाज में छुप छुप कर रहने के अलावा दूसरा चारा नहीं.


इतालवी ट्राँससेक्सुअल एसोशियेशन के अनुसार इटली में करीब दस हजार व्यक्ति हैं जो अपने आप को गलत शरीर में बंद कैदी समझते हैं और सेक्स बदलना चाहते हैं. पर इस बात की जाँच करने के लिए आवश्यक है कि व्यक्ति व्यस्क हो क्योंकि किशोरावस्था में अपनी यौन पहचान के बारे में दुविधा होना सामान्य बात है और समय के साथ अधिकाँश किशोर अपनी यौन पहचान को समझ जाते हैं.

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