7 जन॰ 2015

खट्ठा मीठा कामसूत्र

कुछ दिन पहले मैंने एक अंतर्राष्ट्रीय वर्कशोप में भाग लिया. इस वर्कशोप का कुछ भाग "विकलांगता और यौनता" (Disability & Sexuality) के विषय पर संयोजित था जो मुझे संचालित करना था और उसकी तैयारी करने के लिए मैंने इस विषय पर लिखी किताबों और लेखों को ढ़ूंढ़ा. इसी खोज में मुझे मिली एक इतालवी विकलांग युवक गाब्रीएले विति (Gabriele Viti) द्वारा लिखी किताब "कामसूत्रा देई दिसाबिलि" यानि विकलांगों के लिए कामसूत्र. सारी पुस्तक में एक तरफ तो इस विषय के विभिन्न पहलुओं का विषलेषण है और दूसरी ओर कामसूत्र के विभिन्न यौन मुद्राओं के चित्र हैं जिनके पात्र हैं विकलांग स्त्री पुरुष.

चूँकि इस वर्कशोप में एशिया, अफ्रीका, दक्षिण अमेरिका के विभिन्न देशों से विभिन्न संस्कृति, धर्म के स्त्री और पुरुष दोनो ही भाग ले रहे थे, मैंने सोचा कि लोगों की भावनाओं का आदर करते हुए, इस नाजुक विषय पर बात बहुत सावधानी से उठानी चाहिये, वरना यह हो सकता है कि लोग इस विषय में ठीक से बात नहीं कर पायेंगे. वर्कशोप में व्यक्तिगत अनुभव बताने के लिए मैंने कई लोगों से प्राथना की पर बहुत से लोगों ने मना कर दिया. फिर मैंने बोलोनिया विश्वविद्यालय के यौनता विज्ञान के प्रोफेसर से बात की तो उन्होंने कुछ सुझाव दिये पर कहा कि इस तरह विभिन्न भाषाओं, संस्कृतियों और धर्मों के साथ यौनता जैसे विषय पर बात करना आसान नहीं होगा. यही सोच कर मैंने गाब्रीऐले की किताब पास तो रखी पर सोचा कि इसके बारे में सीधा बात नहीं करनी चाहिये.

जब वर्कशाप प्रारम्भ हुई तो धीरे धीरे सारे डर निकल गये. शुरु शुरु में बहुत से लोग खुल के बात नहीं कर पा रहे थे पर कुछ लोगों ने आपबीती सुनानी शुरु की और बातें निकलने लगीं. पहले दिन मैंने गाब्रीएले की किताब बंद ही दिखायी और किताब में क्या है उसका कुछ विवरण दिया और कहा कि वर्कशाप के तीन दिन वह किताब वहीं मेज पर रहेगी, जो चाहे वह आकर देख सकता है. सोचा नहीं था कि इतने लोग देखने आयेंगे और उस किताब की प्रतियां माँगेगे या फोटोकापी करने के लिए कहेंगे. बहुत से लोगों ने स्वीकारा कि यह किताब उनके देश में गैरकानूनी मानी जायेगी पर यह भी कहा कि विकलांग लोगों के लिए उन चित्रों को देख कर बहुत सहायता मिलेगी.

कुछ वर्ष पहले जब मैंने इटली में इस विषय पर शोध किया था तब भी एक विकलांग युवक ने ऐसा ही कुछ करने का सुझाव दिया था. उसका कहना था कि पोर्नोग्राफी पत्रिकाओं में कभी कभी विकलांग स्त्री और युवक पात्र भी होने चाहिये, जिन्हे देख कर सब युवा लोग समझ सकते हैं कि विकलांग व्यक्ति भी व्यक्ति हैं और सब की तरह यौनता उनके भी जीवन का भाग है. ऐसी पत्रिकांए इटली में अखबार वाले की दुकान पर खुलेआम बिकती हैं.

मेरे विचार में गाब्रीएले की किताब इसी बात से प्रभावशाली है कि चित्रों के माध्यम से विकलांग व्यक्तियों के लिए यौनता के महत्व की बात इतने साफ और स्पष्ट ढ़ंग से कहती है. इस पुस्तक का लिखा हुआ भाग मुझे अधिक प्रभावशाली नहीं लगा क्योंकि वह अध्यापन की कठिन भाषा में है और कठिनाईयों की बात ज्यादा करता है. दूसरी ओर इसके चित्र जीवनधारा की खुशियों का चित्रण हैं, उनमें कठिनाईयों से जीतने की प्रेरणा है.

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