07/01/2015

पुरुष यौनता की कठिनाईयाँ

अक्सर लोग, विषेशकर युवा, मुझसे ईमेल के माध्यम से स्वप्नदोष या शीघ्रपतन के बारे में सलाह माँगते हैं, कि क्या करना चाहिये. किशोरों तथा युवाओं के मन में इस तरह की चिन्ताएँ उठना कुछ हद तक स्वाभाविक है, क्योंकि इस विषय पर अन्य लोगों से बात करना या सलाह माँगना आसान नहीं है.

आज की पोस्ट में इसी विषय में बात करना चाहता हूँ - यानि, पुरुष यौन अंग कौन से होते हैं, किस तरह काम करते हैं और शीघ्रपतन तथा स्वप्नदोष क्या होते हैं.

Male sexuality graphic by Sunil Deepak, 2014

भारत में पुरुष यौनता से जुड़े पाराम्परिक विश्वास

भारत के पाराम्परिक विश्वास में पुरुष वीर्य को बहुत महत्व दिया गया है. कहते हैं कि वीर्य की एक बूँद कई लाख खून के कणों से बनती है. इसलिए वीर्य पतन के साथ शारारिक कमज़ोरी को जोड़ा गया है और नवयुवाओं को ब्रह्मचर्य पालन यानि वीर्य को सम्भाल कर रखने की सलाह दी जाती है.

इस वजह से हस्तमैथुन को गलत माना जाता है और यह सोच बनती है कि हस्तमैथुन करने वाले नवयुवक धीरे धीरे सामान्य सम्भोग की शक्ति खो बैठते हैं जिसकी वजह से वह यौनक्रिया के काबिल नहीं रहते और उनमें शीघ्रपतन या स्वप्नदोष जैसी "बीमारियाँ" उभर आती हैं. इस मानसिक सोच से जुड़े डरों के के आसपास बहुत से हकीम-वैद्य-डाक्टरों के कारोबार टिके हैं जो इस डर का फायदा उठाते हैं.

पुरुष यौनता और भूमण्डलीकरण

जहाँ एक ओर पाराम्परिक सोच वीर्य को सम्भालने की बात करती है तथा हस्तमैथुन, स्वप्नदोष आदि को बीमारियाँ मानती है, वहीं दूसरी ओर बढ़ते हुए भूमण्डलीकरण से पुरुष यौनता सम्बंधित नयी कठिनाईयाँ सामने आयीं हैं जिनमें से सबसे प्रमुख है यौन सम्बन्धों को दिखाने वाली पोर्नोग्राफ़ी की फ़िल्में जिनसे युवाओं के मन में यौन सम्बन्ध कैसे हो इसकी गलत अपेक्षाएँ बनती हैं.

इस तरह से सेक्स दिखाने वाली फिल्में पिछले दस-बीस सालों में भारत में हर जगह डीवीडी में या इंटरनेट से आसानी से उपलब्ध हैं. लोग चाहें तो ऐसी फ़िल्मों को अपने मोबाइल टेलीफ़ोन पर भी देख सकते हैं.

पाराम्परिक सोच, यौन अंगो और सम्बन्धों के बारे में जानकारी न होना और यह सेक्स फ़िल्में, इस सब की वजह से, सेक्स कैसा होना चाहिये, यौन अंग कैसे होने चाहिये, सेक्स किस तरह करना चाहिये, सेक्स कितनी देर तक करना चाहिये, जैसी बातों पर किशोर व युवाओं के विचार बनते हैं. इसका असर यह होता है कि अगर हम उस तरह से सेक्स नहीं कर सकते या हमारे सेक्स अंग उन फ़िल्में में दिखने वाले लोगों जैसे नहीं तो हमारे मन में हीन भावना आ जाती है.

पुरुष शरीर व यौन अंग

बेमतलब की मानसिक परेशानियों से बचने के लिए आवश्यक है कि किशोरों व युवाओं को अपने शरीर तथा यौन अंगो के बारे में सही जानकारी हो.

पुरुष शरीर के यौन अंगों को नीचे की इस तस्वीर में देख सकते हैं.

Male sexuality graphic by Sunil Deepak, 2014

पुरुष में तीन प्रमुख यौन अंग होते हैं - लिंग, वीर्य बनाने वाली गोलियाँ (अण्डकोष) तथा अण्डकोष को लिंग से जोड़ने वाली नलियाँ.

इनके अतिरिक्त, लिंग की जड़ के पास प्रोस्टेट और सेमिनल वेसीकल नाम की ग्रंथियाँ होती है, जिसमें यौन क्रिया में लिंग की चिकनाई बढ़ाने के लिए तेल तथा जल जैसे पदार्थ बनते है, जिनसे वीर्यकोषों को पोषण मिलता है. वीर्य की नली, प्रोस्टेट से हो कर लिंग की जड़ में पहुँचती है.

जब वीर्य पुरुष शरीर से बाहर निकलता है तो उसका द्रव्य अधिकतर सेमिनल वेसिकल में बने पदार्थों से बनता है जिसमें सूक्षम मात्रा में अण्डकोष और प्रोस्टेट के पदार्थ जुड़ जाते हैं.

पुरुष लिंग केवल यौन अंग नहीं है, यह साथ ही पिशाब निकालने के रास्ते द्वारा गुर्दे तथा यूरेनरी ब्लेडर से भी जुड़ा होता है. जिस समय पिशाब करते हैं तो वीर्य की नली वाला रास्ता बन्द रहता है और जब वीर्य निकलने का समय आता है उस समय पिशाब का रास्ता बन्द हो जाता है.

वीर्य बनाने वाली गोलियों (अण्डकोषों) को वीर्य की फैक्टरियों जैसा समझ सकते हैं. यह गोलियाँ जब बच्चा माँ के पेट में होता है, उस समय यह पेट के अन्दर, गुर्दों के पास होती हैं और गर्भ में बच्चे के बढ़ने के साथ नीचे उतरती हैं. जब बच्चा पैदा होता है, उस समय अधिकतर बच्चों में यह गोलियाँ पेट से बाहर निकल कर, लिंग के नीचे लटक जाती हैं. अक्सर बच्चों में यह गोलियाँ, थोड़ा सा दबाओ तो वापस पेट की दीवार में या पेट के भीतर भी जा सकती हैं, लेकिन जैसे जैसे बच्चा बड़ा होता है, पेट का रास्ता बन्द हो जाना चाहिये और गोलियों को पेट में वापस नहीं जाना चाहिये.

अण्डकोषों का बाहर रहना उनके सही काम करने के लिए आवश्यक है क्योंकि वीर्य के कोषों को बाकी शरीर से ठँडा तापमान चाहिये. अगर गोलियों को ठँडा तापमान नहीं मिलता तो वीर्यकोष अच्छे नहीं बनते तथा उन लोगों को सन्तान होने में कठिनाई हो सकती है.

अगर लोग बहुत तंग जाँघिया या पैंट पहने, या फ़िर लम्बे समय तक प्रतिदिन गोलियों को गर्म जगह पर रखें (जैसे कि मोटरसाइकल पर बैठ कर) तो इससे भी वीर्य में सन्तान पैदा करने की शक्ति कम हो सकती है.

जब पुरुष नसबन्दी का ऑपरेशन कराते हैं तो अण्डकोषों के पास ही वीर्य की नली को बाँध दिया जाता है या काट दिया जाता है. इस तरह से पुरुष नसबन्दी के बाद भी वीर्यपात तो करता है और उसमें प्रोस्टेट तथा सेमिनल वेसिकल की ग्रंथियों में बना जल, तेल व अन्य पदार्थ सब कुछ पहले जैसे होते हैं, उसमें केवल वीर्यकोष नहीं होते. इस तरह से नसबन्दी के बाद भी पुरुष में सेक्स के दौरान वीर्यपात होना बन्द नहीं होता.

क्योंकि पुरुष के अण्डकोष तथा वीर्य की नलकी, शरीर के बाहर, लिंग के नीचे होती हैं, पुरुष नसबन्दी का ऑपरेशन स्त्री नसबन्दी के मुकाबले बहुत अधिक आसान है.

जब लड़का किशोरावस्था में आता है, उसका शरीर टेस्टोस्टिरोन नाम का हारमोन बनाने लगता है जिससे लिंग का आकार बढ़ता है, शरीर में बाल आ जाते हैं, आवाज़ भारी हो जाती है. उस समय उसके अण्डकोष, वीर्यकोषों को बनाना प्रारम्भ करते हैं और उसका शरीर वीर्यपात के द्वारा प्रजनन के लिए तैयार हो जाता है.

वीर्यकोष में बनने वाले कोष अगर बाहर न निकलें तो अण्डकोष के अन्दर ही मर जाते हैं, लेकिन सेमिनल वेसिकल का द्रव्य जब भर जाता है तो अक्सर रात को स्वप्नदोष के रूप में कुछ कुछ दिनों में निकलता रहता है. इस तरह वीर्य का बनना और निकलना इस फैक्टरी के सही काम करने की निशानी है और प्राकृतिक बात है.

वीर्य में क्या होता है?

वीर्य की मात्रा करीब 2 से 5 मिलीलिटर होती है. इसमें 70-75 प्रतिशत तक सेमिनल वेसीकल में बना द्रव्य होता है, 20-23 प्रतिशत प्रोस्टेट में बने पदार्थ होते हैं, 1 प्रतिशत चिकनाई के पदार्थ होते हैं और करीब 2 प्रतिशत तक वीर्यकोष होते हैं. इसमें केल्शियम, क्लोराइड, फ्रुकटोज़, मेगनीशयम, पोटिशयम जैसे तत्व सूक्षम मात्रा में होते हैं, यानि पोषित खाने में पाये जाने वाले सामान्य तत्व होते हैं.

वीर्यकोष दो तरह के होते हैं - एक्स (x) क्रमोसोम वाले तथा वाई (y) क्रोमोसोम वाले. दूसरी ओर नारी के शरीर में केवल एक तरह का अँडकोष होता है, एक्स (x) क्रोमोसोम वाला. अगर माँ के एक्स क्रोमोसोम वाले अँडकोष से पिता का एक्स (x) क्रोमोसोम वाला वीर्यकोष मिलता है तो लड़की का भ्रूण बनता है. अगर माँ के एक्स (x) क्रोमोसोम से पिता का वाई (y) क्रोमोसोम  वाला वीर्यकोष मिले तो लड़के का भ्रूण बनता है. यानि बेटा होगा या बेटी, यह पिता के वीर्य पर निर्भर करता है, माँ के अँडकोष से नहीं निर्भर करता.

अगर चाहते हैं कि यौन सम्बन्धों से लड़की गर्भवती नहीं हो तो पुरुष को अपने तने हुए लिंग पर कण्डोम चढ़ाना चढ़ा कर सम्भोग करना चाहिये. कण्डोम से गर्भ रोकने के अतिरिक्त एडस तथा सिफलिस जैसे अन्य यौन रोगों से भी बचाव होता है.

स्वप्नदोष या हस्तमैथुन

रात को सोते हुए वीर्यपात होने को स्वप्नदोष कहते हैं.

किशोरों में सेमिनल वेसिकल में द्रव्य उद्पादन बहुत बढ़ा होता है, इसलिए किशोरावस्था में सोते समय वीर्यपात होना स्वाभाविक है. जब द्रव्य शरीर में भर जाता है तो आसानी से निकल जाता है. अक्सर इसके साथ सेक्स से जुड़े सपने होते हैं.

जब लड़के हस्तमैथुन सीख जाते हैं या सेक्स सम्बन्ध बनाने लगते हैं तो वीर्य द्रव्य को बाहर निकलने के लिए स्वाभाविक रास्ता मिल जाता है और स्वप्नदोष अपने आप ही बन्द हो जाता है.

उम्र के साथ, वीर्य द्रव्य का बनना कम हो जाता है, शरीर में हारमोन कम हो जाते हैं, इस तरह से यौन इच्छा कम हो जाती है और यौन सम्बन्ध न हों तो भी स्वप्नदोष बहुत कम होता है. स्वप्नदोष तथा हस्तमैथुन दोनो को ही स्वाभाविक माना जाता है. इनसे लिंग की सम्भोग शक्ति पर कुछ असर नहीं पड़ता, यह तो शरीर में जागने वाली इच्छाओं को संतुष्ट करने के सामान्य साधान हैं.

किशोर शरीर में हारमोन बढ़े होते हैं जिनकी वजह से उनके मन में यौन इच्छा व विचारों का उठना स्वाभाविक है. इस तरह के विचार खेल, वर्जिश आदि से कम हो सकते हैं, जिससे शरीर का ध्यान दूसरी ओर हो जाता है, लेकिन बिल्कुल बन्द नहीं होते. दूसरी ओर, यौन इच्छा व विचारों को बिल्कुल बन्द करने से किशोर मन में मनोवैज्ञानिक ग्रँथियाँ बन जाती है जिससे शरीर के मानसिक विकास पर गलत प्रभाव पड़ता है.

दुर्भाग्यवश, पाराम्परिक सोच में ब्रह्मचर्य तथा वीर्य संभाल कर रखने को इतना अधिक महत्व दिया गया है कि न चाहने पर भी, किशोर व युवा, स्वप्नदोष तथा हस्तमैथुन को गलत सोचते हैं और अपनी इच्छाओं को काबू या संयम न कर पाने से खुद को अपराधी महसूस करते हैं. यौन सम्बन्धों से जुड़े बहुत सारे रोग व कठिनाईयाँ इसी अपराध भावना और मानसिक डर से उपजते हैं.

शीघ्रपतन

शीघ्रपतन का अर्थ है कि सेक्स क्रिया के शुरु होते ही जल्दी से वीर्यपतन होना. ऐसे लोग सोचते हैं कि उनमें वीर्यपतन को रोकने की शक्ति नहीं और वह लम्बे समय तक सम्भोग करने की कामना रखते हैं.

पोर्नोग्राफी की फ़िल्मों में पुरुषों को 10-30 मिनट तक या इससे भी अधिक समय तक सम्भोग करते दिखलाया जाता है. यह फ़िल्में देख कर युवा सोचने लगते हैं कि, "मुझसे तो ऐसा नहीं होता यानि मुझमें कुछ कमी है या मुझे शीघ्रपतन की तकलीफ़ है".

पुरुष यौनांग (लिंग) अँदर से स्पोँज जैसे माँस से बना होता है जिसमें रक्त के भरने से लिंग तन जाता है. सम्भोग के लिए लिंग का ठीक से तनना आवश्यक है. लेकिन लिंग के तनने में मानसिक सोच का गहरा प्रभाव है, जिसकी वजह से कहते हैं सेक्स सारा दिमाग में होता है. यानि, अगर किसी तरह की चिन्ता हो, या मन में हीन भावना हो या अपराधी भावना हो या यह सोचा जाये कि मुझमें सेक्स की क्षमता कम है तो अपने आप ही लिंग का ठीक से तनना कठिन हो जाता है.

आप के लिंग में कोई सचमुच की बीमारी है या केवल मानसिक दबाव से ऐसा हो रहा है, यह समझने के लिए दो तीन दिन तक सेक्स से परहेज करिये, फ़िर देखिये कि सोते सोते या रात में उठने पर या सुबह उठने पर पिशाब करने के समय, आप का लिंग अपने आप तनता है या नहीं - अगर तनता है तो इसका अर्थ है कि लिंग तनने में कोई बीमारी नहीं, बल्कि आप की कठिनाई मानसिक दबाव या सोच की वजह से हैं.

कभी कभी, काम से जुड़ी या जीवन की अन्य चिन्ताओं से भी शीघ्रपतन की बात जुड़ सकती है.

डायबीटिज़ या हाई ब्लड प्रेशर जैसी बीमारियों से, कुछ दवाओं से, या प्रोस्टेट के ऑपरेशन के बाद भी लिंग के ठीक से तनने में कठिनाई हो सकती है. अगर सचमुच की शारीरिक कठिनाई है तो डाक्टर से सलाह लीजिये. अगर बात मानसिक दबाव की है तो सोचिये की क्या आप को सचमुच शीघ्रपतन की तकलीफ़ है या आप पोर्नोग्राफ़ी फ़िल्मों से या अन्य लोगों से सुनी बातों से अपने आप से गलत अपेक्षाएँ बना रहे हैं?

अगर वीर्यपात लिंग तनने के एक मिनट के अंदर हो जाये तो उसे शीघ्रपतन माना जाता है. अगर वीर्यपात एक मिनट से अधिक अविधि के बाद हो तो उसे शीघ्रपात नहीं कहते. औसत पुरुष में वीर्यपात, सम्भोग के शुरु होने से 5 से 8 मिनट के समय में होता है.

पोर्नोग्राफ़ी की फ़िल्मों में जब पुरुषों को आधे घँटे या अधिक समय तक सम्भोग करते हुए दिखाया जाता है तो अक्सर वह एक वीर्यपात के बाद वियागरा जैसी दवाओं से लिंग को तना कर किया जाता है, या फ़िर सम्भोग के दृश्य को विभिन्न एक्टरों के साथ करके जोड़ दिया जाता है. अपने लिंग की लम्बाई को या सम्भोग करने के समय को पोर्नोग्राफ़ी फ़िल्मों के मापदँड पर तौलना बेवकूफ़ी है.

शीघ्रपात का इलाज

सेक्स का उद्देश्य आप को तथा आप के सम्भोग साथी को सुख व आनन्द देना है. सम्भोग कितना लम्बा हुआ या लिंग कितना बड़ा या मोटा है, सेक्स का आनन्द उस पर निर्भर नहीं करता, बल्कि इस बात पर निर्भर करता है कि आप में अपने साथी की ज़रुरतों को पहचानने की और उन्हे पूरा करने की क्षमता है या नहीं.

एक बार मन से यौन सम्भोग की लम्बाई की चिन्ता को छोड़ कर, कैसे साथी को यौन आनन्द के चर्म पर पहुँचायें की चिन्ता करेंगे तो शीघ्रपात की बात भूल जायेंगे. नारी सम्भोग में यौन आनन्द देने के बारे में मैंने पहले एक बार लिखा था, आप उस आलेख को फ़िर से पढ़ सकते हैं.

सम्भोग की अविधि बढ़ाने के लिए कई तरह के उपाय बताये जाते हैं, जैसे कि कण्डोम पहनना या ज़ाइलोकेन (Xylocaine jelly) जैसी एनिस्थेटिक क्रीम लगाना जिससे लिंग को स्पर्श की अनुभूति कम हो. एक अन्य उपाय है सम्भोग के पहले हस्तमैथुन करना और आवश्यकता पड़ने पर वियाग्रा जैसे दवाई की सहायता से सम्भोग करना.

मेरे विचार में यह उपाय उतना काम नहीं करते क्योंकि सेक्स लिंग की अनुभूति से अधिक हमारे दिमाग में क्या है, उस पर अधिक निर्भर करता है. जब तक मन में चिन्ता रहेगी, कुछ अन्य उपाय काम नहीं करेंगे. मेरी सलाह है कि सेक्स सम्बन्धी चिन्ता घटाने के लिए मानसिक डीकन्डीशनिंग करिये जिसका एक तरीका नीचे बता रहा हूँ.

यौन सम्बन्ध बेहतर करने के लिए मानसिक सोच को सुधारना

मानसिक डीकन्डीशनिंग का एक तरीका है जिसका उद्देश्य है अपने साथी के साथ मिल कर, एक दूसरे के शरीर को जानना तथा भीतरी अनुभूतियों को समझना. इससे आत्मविश्वास बढ़ता है, यौन साथियों में आत्मीयता बढ़ती है तथा यौन सम्बन्धों में सुधार होता है.

इसके लिए पहले तीन दिनों तक सोते समय अपने साथी से सट कर लेटिये, बस एक ही शर्त है कि कुछ भी हो जाये, आप हाथों से एक दूसरे के यौन अंगों को नहीं छूएगें और सम्भोग करने की कोशिश नहीं करेंगे. न पुरुष को वीर्यपात हो, न नारी को यौनान्द का चर्म मिले. हो सके तो इसे निर्वस्त्र हो कर या कम वस्त्र पहन कर कीजिये. इन तीन दिनों में आप को एक दूसरे के यौन अंगो को छोड़ कर शरीर के विभिन्न हिस्सों में क्या अनुभूतियाँ होती हैं, उन्हें समझना व जानना है. मन में चाहे जितनी भी यौन आनन्द या सम्भोग की इच्छा उठे, उस पर ध्यान नहीं दीजिये. बल्कि यह समझने की कोशिश कीजिये कि यौन इच्छा के साथ शरीर के विभिन्न भागों में किस तरह की अनुभूतियाँ उठती हैं. उस समय अपने मन में क्या विचार आते हैं, उन्हें अपने साथी से बाँटिये.

तीन दिनों के बाद, अगले तीन दिनों तक, बिना सम्भोग के, आप को एक दूसरे को यौन आनन्द के चर्म तक ले जाना है. चाहे वह हाथों के सहारे करिये, चाहे मुँह के, चाहे शरीर के किसी अन्य अंग की सहायता से, बस अपने यौन अंगों को आपस में नहीं छूने दीजिये. इन तीन दिनों में आप का ध्येय है बिना सम्भोग के यौन आनन्द कैसे होता है, इसे समझना, एक दूसरे के शरीर को जानना कि शरीर के कौन से हिस्से में यौन अनुभूतियाँ होती हैं, किस अनुभूति से आप को तथा आप के साथी को अधिक आनन्द मिलता है. सेक्स में कोई जबरदस्ती नहीं होनी चाहिये, हर बात दोनो की मर्ज़ी से होनी चाहिये,

सातवें दिन के बाद आप पूर्ण सम्भोग कर सकते हैं. अगर आप को लगे कि शीघ्रपतन की बात में पूरा सुधार नहीं हुआ तो छहः दिन की डीकन्डीशनिंग को दोबारा से करिये.

निष्कर्श

पुरुष यौनता के साथ बहुत सी चिन्ताएँ जुड़ी हैं. इन चिन्ताओं की वजह से पुरुष के मन में अक्सर डर आ जाता है जो शीघ्रपत्न या स्वप्नदोष जैसी समस्याओं को बना देता है.

इन समस्याओं के एक बड़ा कारण है यौन अंगो तथा क्रिया के बारे में सही जानकारी का न होना. पराम्परिक सोच का भी, जैसे कि वीर्य को अमूल्य मानना या हस्तमैथुन को गलत सोचना, मानसिक चिन्ता बना सकते हैं जिनसे शरीर की यौन शक्ति पर गलत प्रभाव पड़ता है.

मन से चिन्ता को हटाना और अपने सेक्स साथी के साथ अपने शरीर को जानना और अपनी इच्छाओं को समझना, इससे सेक्स सम्बन्धी समस्याओं का निदान हो सकता है. इसमें डीकन्डीनिंग जैसे तरीकों से मदद मिल सकती है.

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